छत्तीसगढ़ प्रगतिशील किसान संगठन के राजकुमार गुप्त, आई के वर्मा, झबेंद्र भूषण वैष्णव ने मोदी सरकार के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा है तीन कृषि कानूनों की वापसी किसानों के लिये एक पड़ाव है।
मंजिल नहीं, किसानों की मंजिल न्यूनतम गारंटी मूल्य कानीन है, तीन कानूनों की वापसी से 4 जून 2020 की स्थिति बहाल हुई है इससे किसानों की समस्या दूर नहीं होगी, 4 जून से पहले देश के किसान संगठन कृषि उपजों के लिये न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी की मांग को लेकर संघर्ष करते रहे हैं जो अभी पूरा होना बाकी है लिहाजा किसानों का संघर्ष जारी रहेगा।
किसान संगठन के नेताओं ने कहा है कि एक साल के आंदोलन के दौरान किसानों पर अनेक अनर्गल और निराधार आरोप लगाकर अपमानित किया गया, किसान आंदोलन का हर प्रकार से दमन किया गया, आंदोलन के दौरान सैकड़ों किसान शहीद हो गये, किसानों ने बड़ी कुर्बानियां दी है।
जिसका हिसाब लेना अभी बाकी है, भाजपा, एनडीए के दलों और मोदी सरकार को इसकी जिम्मेदारी लेकर किसानों से माफी मांगनी चाहिये, छत्तीसगढ़ प्रगतिशील किसान संगठन ने 26 नवंबर को किसान आंदोलन के एक साल पूरे होने पर च्च्विजय दिवसज्ज् के रूप में मनाने का निर्णय लिया है।
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