नोटबंदी (Demonetisation) के 5 साल बाद डिजिटल भुगतान (Digital Transaction) में तेजी के बावजूद चलन में नोटों की संख्या में भी लगातार वृद्धि हो रही है। हालांकि, वृद्धि की रफ्तार धीमी है। दरअसल, कोविड-19 महामारी के दौरान लोगों ने एहतियात के रूप में नकदी रखना बेहतर समझा। इसी कारण चलन में बैंक नोट पिछले वित्त वर्ष के दौरान बढ़ गए। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार डेबिट/क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग और यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) जैसे माध्यमों से डिजिटल भुगतान में भी बड़ी वृद्धि हुई है।
इस अवधि के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक शाखाओं की संख्या मार्च, 2010 के 33,378 से बढ़कर दिसंबर 2020 में 55,073 हो गई है। गांवों में बैंकिंग आउटलेट/बैंकिंग प्रतिनिधियों (बीसी) की संख्या मार्च, 2010 के 34,174 से बढ़कर दिसंबर, 2020 में 12.4 लाख हो गई है।
इस अवधि के दौरान प्रति एक लाख वयस्कों पर वाणिज्यिक बैंक शाखाओं की संख्या 13.5 से बढ़कर 14.7 हो गई। बैंकों में जमा खातों की संख्या प्रति हजार व्यस्क 1,536 से बढ़कर 2,031 हो गई, ऋण खातों की संख्या 154 से 267 हो गई, और मोबाइल और इंटरनेट बैंकिंग लेनदेन की संख्या 183 से बढ़कर 13,615 हो गई। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने कुल 44 करोड़ नो-फ्रिल खातों में से 34 करोड़ और निजी क्षेत्र के बैंकों ने इनमें से सिर्फ 1.3 करोड़ खाते खोले हैं।
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